भारत / 11 मार्च, 2018 / लेखक:/ जानकारी का स्रोत: dainikuttaranchaldeep
परंपरागत व आधुनिक शिक्षा पद्धतियों पर परिचर्चा
अल्मोड़ा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में एनआईओएस, डीएलएड के व्यक्तिगत संपर्क कार्यक्रम (पीसीपी) के दशम दिवस पर प्रशिक्षुओं ने परंपरागत व आधुनिक शिक्षा पद्धतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही शिक्षण में सफल होने के लिए सर्वप्रथम भाषायी दक्षता हासिल करने का आह्वान किया।
सर्वप्रथम प्रशिक्षुओं द्वारा प्रार्थना सभा की गतिविधियों का संचालन किया गया। तत्पश्चात सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए डॉ. हेम चंद्र तिवारी ने उपस्थित प्रशिक्षुओं एवं संदर्भदाताओं का स्वागत किया। नवम दिवस की आख्या नेहा बिष्ट द्वारा प्रस्तुत की गयी। डायट के डॉ. हरीश चंद्र जोशी ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए डायट मथुरा, एनसीटीई भोपाल तथा विभिन्न अन्य प्रशिक्षण संस्थानों के भ्रमण से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। साथ ही प्रशिक्षुओं का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल और अभिवृत्ति को अद्यतन रखें तथा इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ कक्षा-कक्षों तक पहुंचाएं। इसके बाद डॉ. कपिल नयाल ने प्रारंभिक स्तर पर गणित शिक्षण पर चर्चा की। इसमें विद्यार्थी के अवलोकन, बोध एवं संज्ञानात्मक अवस्थाओं पर विचार-विमर्श किया गया। डॉ. हेम चंद्र तिवारी ने शिक्षण विधियों पर चर्चा की जिसमें परंपरागत एवं आधुनिक शिक्षण विधियों पर चर्चा-परिचर्चा की गयी। विषयानुरूप शिक्षण विधि का प्रयोग करने एवं बाल केंद्रित शिक्षण विधियों को कक्षा कक्ष में अपनाने की बात कही गयी। डॉ. मनोज ने भाषाई दक्षता विकसित करने के तरीकों पर चर्चा की।
इस अवसर पर ललित भट्ट, जयपाल सिंह, गोपाल सिंह, अर्चना पंत, अनीता, चांदनी अधिकारी, गुडिय़ा, प्रेमा आर्या, आनंद सिंह भंडारी आदि प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
समाचार का स्रोत:
http://dainikuttaranchaldeep.com/%E0%A4%95%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%A6/








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